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Showing posts from June, 2022

कलाकार की हत्या कला की हत्या है

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"चौबर दे चेहरे उत्ते नूर दसदा नि  एहदा अट्ठूगा जवानी चे जनाज़ा मिट्ठिये" नूर, कहते हैं कि आपके किरदार का नूर आपके चेहरे पर चमकता है। ऐसा ही नूर था जो उठा तो जवानी में जनाज़ा साथ लेकर उठा। किसका था यह नूर? कौनसी ऐसी शय थी पंजाब में जो कैनेडा के ब्रैम्पटन से लेकर वैंकूवर तक..अमेरिका के ईस्ट कॉस्ट से लेकर वेस्ट कॉस्ट तक..ऑस्ट्रेलिया में सिडनी, मेलबर्न से लेकर मिडिल ईस्ट में कुवैत, दुबई तक...पेशावर से लेकर पटना तक रौशनी फैला रही थी।  यह शय थी शुभदीप सिंह सिद्धू या कहिए सिद्धू मूसेवाला। पंजाब के मानसा शहर के पास एक छोटे से गाँव में जन्मा पला बढ़ा एक ऐसा रचनाकार, गायक और लेखक जो हिपहॉप की दुनिया में महज़ चार साल में अपना ख़ास मक़ाम बना गया। एक ऐसा गीतकार जो कहता था कि उसके गीत उसकी आस पास की दुनिया, उसका पिंड ( गाँव) और रोज़मर्रा की ज़िंदगी की नुमाइश करते हैं।  एक कलाकार की मौत का सबसे बड़ा नुक़सान होता है कला को। ऐसा ही कुछ 29 मई को हुआ जब कुछ अज्ञात हमलावारों ने सिद्धू मूसेवाला की गोली मारकर हत्या कर दी गई। हिपहॉप की दुनिया ने अपना एक चमकता सितारा खो दिया। पंजाबी के महान शायर शिव कुम...

हाउस हसबैंड

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दुनिया के हर माँ-बाप की तरह कीर्ति के मम्मी पापा भी उस के लिए दुनिया का सब से बेहतरीन लड़का ढूँढ रहे थे हालाँकि वो इस बात से अनजान थे कि कीर्ति ने पहले ही तय कर लिया है कि उस के सपनों का राजकुमार कौन होगा। सक्षम और कीर्ति कॉलेज में साथ पड़ते थे, प्यार हुआ, इज़हार हुआ, रिश्ता बना, साथ में कॉलेज ख़त्म किया, फिर आई जॉब की बारी। कीर्ति पढ़ाई में अच्छी थी, उस के लिए एक अच्छी जॉब पाना कोई बड़ी बात नहीं थी। लेकिम सक्षम इस का बिल्कुल उलट था, बहुत एवरेज सा लड़का, न पढ़ाई में ज़ियादा अच्छा न दुनियादारी में। हालाँकि इस चीज़ का फ़र्क़ इनके रिश्ते पर कभी नहीं पड़ा, सक्षम के मुक़ाबले कीर्ति अच्छा कमा लेती थी । कीर्ति ने सक्षम को कभी ये बात जताई नहीं, हमेशा सक्षम के फैसलों की इज़्ज़त की। वैसे तो सब कुछ अच्छा चल रहा था लेकिन दिक़्क़त तब आई जब कीर्ति के माँ-बाप ने उस के लिए रिश्ता देखने लगे । यूँ तो सक्षम बहुत सुलझा हुआ लड़का था लेकिन कीर्ति को ये डर था कि सक्षम कुछ कमाता नहीं है ये जानकर कहीं उस के घर वाले इस रिश्ते के लिए इनकार न कर दें। एक दिन कीर्ति ने सक्षम को मिलने बुलाया और कहा - कीर्ति: "सक्षम, घर वालों ने म...

मोहब्बत या सरदर्द

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 सुधा ने सुनहरे गोटे वाली लाल साड़ी पहनी थी वह चेहरे पर साँझ सी गुलाबी मुस्कान लिए और हाथ में कुछ कागज़ लिए नज़दीकी चिकित्सालय से घर जा रही थी। उसके क़दम मानो हवा में तैर रहे हों ,माथे पर एक छोटी सी काली बिंदी, हाथों में मेहंदी और तकरीबन कंधों तक हरे रंग की चूड़ियाँ पहने हुए थी।नि:संदेह ही वह बला की ख़ूबसूरत लग रही थी। बेख़याली में अपनें हाथों में रची मेहंदी के डिजाइन को निहारते हुए उसमें छुपा “रवि” का नाम देख कर उसकी आँखें टिमटिमाने लगी और चेहरे ने हल्की मुस्कान की दुशाला ओढ़ ली।  रवि , सुधा का पति था, जिसे वो बेहद प्यार करती थी। रवि का साथ होना सुधा के लिए सर्दियों की गुनगुनी धूप के जैसा था। पर काम में व्यस्त रहने के कारण दोनों बस शाम में ही कुछ पल साथ बात कर के बिता पाते थे। सुबह फिर वही भाग - दौड़ वाली ज़िन्दगी। सुधा को कभी भी रवि की किसी भी बात का बुरा नहीं लगा, छोटी छोटी लड़ाईयाँ आख़िर किस घर में नहीं होती पर फिर सब धूप आते ही ओस के जैसे गायब। सुधा और रवि के रिश्ते में जितनी गंभीरता और ज़िम्मेदारियाँ थी, उस से कई ज़ियादा चंचलता और हंसी ठिठोली भी थी। उस दिन सुधा सज सँवर के आई...